श्री देवलसारी महादेव मंदिर devalsari mahadev mandir टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड



श्री देवलसारी महादेव मंदिर

नमस्कार दोस्तों आज के ब्लॉग में एक ऐसे मंदिर के बारे में कुछ जानेगे  जिसमें कहा जाता है कि यहां भगवान शिव के शिवलिंग की जलाभिषेक के बाद पूरी परिक्रमा की जाती है जी हां आपने सही सुना,अब के मन में यह प्रश्न अवश्य उठ रहा होगा की इसमें क्या बड़ी बात है, तो इसमें यह बड़ी बात है कि उत्तराखंड वा भारत में जितने भी  शिवलिंग है उनकी जलाभिषेक के बाद आधी परिक्रमा यानी की जलेरी की जाती है,यह उत्तराखंड  का एकमात्र मंदिर है जहां शिवलिंग का जलाभिषेक के बाद मंदिर की पूर्ण परिक्रमा की जाती है में बता कर रहा हु महादेव के श्री देवलसारी मंदिर के बारे में जो उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के विकासखण्ड जाखणीधार में स्थित एक रहस्य मई मंदिर है| यहां महादेव के शिवलिंग के अलावा गणेश पार्वती की मूर्तियां भी है यहां तीन मंदिर स्थित है जो छोटे-छोटे है|

पौराणिक कथा श्री देवलसारी महादेव मंदिर

यह कथा हमारी पुरानी टेहरी से जुडी हुई है बात उस समय की है जब टेहरी गढ़वाल में कोई बांध नहीं था | कहा जाता है की जब एक  ग्वाला की गाय जंगल से चारके घर की ओर आती थी तो वह गाय मार्ग में कहि पर अपना दूध गिर के आती थी के घर आती थी तो वह अपना दूध किसी स्थान पर गिरा के आ जाती थी,इसे वह ग्वाला बहुत परेशांन हो गया था तब उस ग्वाले ने उस  स्थान को देखने के लिए गया जहां उसकी गाय अपना दूध गिरा देती थी वह उसने देखा की झाड़ियों के बीच में एक शिवलिंग है जिसके ऊपर उसकी गाय हमेशा अपना दूध गिरा देती थी जब उसने उस शिवलिंग को देखा तो उसने इसकी सूचना टिहरी के राजा को दी तब राजा  ने उस स्थान पर एक मंदिर का निर्माण कराया बाद में उत्तराखंड में जब गोरखाओ  ने आक्रमण किया तो उन्होंने उत्तराखंड के कई मंदिरों को तहस-नहस करा|
वे जब इस मंदिर में आए तो इसे भी क्षति पहुंचाने के लिए उन्होंने इस शिवलिंग को  उखाड़ने की कोशिश की किंतु बहुत ज्यादा खोदने ने पर भी शिवलिंग नहीं उखड़ी जिससे गुस्सा होकर उन्होंने शिवलिंग पर एक वार किया जिसके कारण शिवलिंग का एक टुकड़ा देवलसारी  में गिरा तभी से यह का नाम देवलसारी महादेव मंदिर पड़ा  और हर शिवरात्रि राम भक्तों का जमावड़ा रहता है|

श्री देवलसारी महादेव मंदिर रहस्य

इस मंदिर में शिवलिंग के ऊपर दूध की जगह जल चढ़ाया जाता है लेकिन एक रोचक बात यह है की जो जल यह चढ़ाया जाता है उसका निकास स्थान कहाँ है,यह आज तक किसी को नहीं पता क्युकी जब इस शिवलिंग में जल चढ़ाया जाता है तो शिवलिंग सूखी ही रहती है तथा यहाँ जल किधर जाता है यह एक रहस्य ही बना हुआ है मंदिर के पुजारी द्वारा भक्तों के लाए हुए जल को शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है |
दूसरी रोचक बात यह है कि यहाँ नाग-नागिन के जोड़े दिखाई देते है, किन्तु बहुत कम लोगो को आज तक ये जोड़े दिखाई दिए वहा के लोगो का कहना है की ये महादेव के मंदिर की रक्षा करते है,लोगो की यह भी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति यहाँ जो भी कुछ मँगता है उसी मनोकामना अवश्य पूरी होती है|

कहा से पहुँचा जा सकता है


ऋषिकेश.से 75 किलोमीटर  नई टिहरी आकर यहाँ से 30 किलोमीटर टिपरी एक जगह है जो कि टिहरी बांध के सामने ही है वह से करीबन 5 किलोमीटर मुख्य सड़क से निचे यहाँ महादेव का मंदिर स्थित है|


ब्लॉग पढ़ने के लिए आप सभी का तहे दिल से धन्यवाद

जय श्री देवलसारी महादेव  हर हर महादेव


आपका अपना मित्र
विजय सागर सिंह नेगी
From-Tehri Garhwal

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